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भारतीय नागरिकता

नागरिकता की व्यवस्था भारतीय संविधान के 5 से 11 तक के अनुच्छेदों में नागरिकता सम्बन्धी व्यवस्था की गयी है। संविधान अग्रांकित श्रेणी के व्यक्तियों को नागरिकता प्रदान करता है: (1) जन्मजात नागरिक:- संविधान लागू होने के समय (26 जनवरी, 1950 ई.) निम्न तीन श्रेणियों के व्यक्ति भारत के जन्मजात नागरिक माने गये: प्रथम  श्रेणी में वे व्यक्ति आते हैं जो भारत भूमि में पैदा हुए हों, दूसरी  श्रेणी में वे व्यक्ति आते हैं जिनके माता-पिता या इन दोनों में से कोई एक भारत की भूमि में पैदा हुए हों, तथा तृतीय  श्रेणी में वे व्यक्ति आते हैं जो भारतीय संविधान के घोषित होने के पूर्व कम-से-कम 5 वर्ष से भारत भूमि पर निवास कर रहे हों। (2) शरणार्थी नागरिक:- संविधान में उन व्यक्तियों की नागरिकता का भी विवेचन किया गया है जो पाकिस्तान से भारत आये हैं। संविधान के अनुसार वे व्यक्ति जो 19 जुलाई, 1948 के पूर्व पाकिस्तान से भारत आये हैं, भारत के नागरिक समझे जायेंगे। जो व्यक्ति 19 जुलाई, 1948 के बाद पाकिस्तान से भारत आये और जिन्होंने भारत में कम-से-कम 6 मास रहने के बाद उचित अधिकारी के समक्ष नागरिक बनने के लिए प...

रियासतों का एकीकरण और विलय

द्वितीय विश्व युद्ध प्रारंभ होने के पश्चात भारत में तीव्र राजनैतिक गतिविधियां प्रारंभ होने तथा कांग्रेस द्वारा असहयोग की नीति अपनाये जाने के कारण ब्रिटिश सरकार ने क्रिप्स मिशन (1942), वैवेल योजना (1945), कैबिनेट मिशन (1946) तदुपरांत एटली की घोषणा (1947) द्वारा गतिरोध को हल करने का प्रयत्न किया। राष्ट्रीय अस्थायी सरकार में रियासत विभाग के मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल, जिन्हें मंत्रालय के सचिव के रूप में वी.पी. मेनन की सेवायें प्राप्त थीं, भारतीय रियासतों से देशभक्तिपूर्ण अपील की कि वे अपनी रक्षा, विदेशी मामले तथा संचार अवस्था को भारत के अधीनस्थ बना कर भारत में सम्मिलित हो जायें। 15 अगस्त 1947 के अंत तक 136 क्षेत्राधिकार रियासतें भारत में सम्मिलित हो चुकी थीं। किंतु कुछ अन्य ने स्वयं को इस व्यवस्था से अलग रखा जूनागढ़ यहां का मुस्लिम नवाब रियासत को पाकिस्तान में सम्मिलित करना चाहता था किंतु हिंदू जनसंख्या भारत में सम्मिलित होने के पक्ष में थी। जनता ने भारी बहुमत से भारत में सम्मिलित होने के पक्ष में निर्णय दिया। हैदराबाद हैदराबाद का निजाम अपनी संप्रभुता को बनाये रखने के पक्ष में था। यद्यपि...

भारतीय संविधान के भाग व संविधान की प्रस्तावना

भारतीय संविधान के भाग भाग 1 संघ और उसके क्षेत्र- अनुच्छेद 1-4 भाग 2 नागरिकता- अनुच्छेद 5-11 भाग 3 मूलभूत अधिकार- अनुच्छेद 12 - 35 भाग 4 राज्य के नीति निदेशक तत्व- अनुच्छेद 36 - 51 भाग 4 A मूल कर्तव्य- अनुच्छेद 51A भाग 5 संघ- अनुच्छेद 52-151 भाग 6 राज्य- अनुच्छेद 152 -237 भाग 7 संविधान (सातवाँ संशोधन) अधिनियम,- 1956 द्वारा निरसित भाग 8 संघ राज्य क्षेत्र- अनुच्छेद 239-242 भाग 9 पंचायत - अनुच्छेद 243- 243O भाग 9A नगर्पालिकाएं- अनुच्छेद 243P - 243ZG भाग 10 अनुसूचित और जनजाति क्षेत्र- अनुच्छेद 244 - 244A भाग 11 संघ और राज्यों के बीच संबंध- अनुच्छेद 245 - 263 भाग 12 वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद -अनुच्छेद 264 -300A भाग 13 भारत के राज्य क्षेत्र के भीतर व्यापार, वाणिज्य और समागम- अनुच्छेद 301 - 307 भाग 14 संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं- अनुच्छेद 308 -323 भाग 14A अधिकरण- अनुच्छेद 323A - 323B भाग 15 निर्वाचन- अनुच्छेद 324 -329A भाग 16 कुछ वर्गों के लिए विशेष उपबंध संबंध- अनुच्छेद 330- 342 भाग 17 राजभाषा- अनुच्छेद 343- 351 भाग 18 आपात उपबंध अनुच्छेद- 352 - 360 भाग 19 प्रकीर्ण- ...

राजस्थान का सामान्य परिचय

Rajasthan ka Samanya Parichay राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से हमारे देश का सबसे बड़ा राज्य है। राजस्थान देश के उत्तर पश्चिम में स्थित है। छठी सताब्दी के बाद राजस्थानी भू भाग में राजपूत राज्यों का उदय प्रारंभ हुआ । राजपूत राज्यों की प्रधानता के कारण इसे राजपुताना कहा जाने लगा । वाल्मीकि ने राजस्थान प्रदेश को ‘मरुकांतर’ कहा है। राजस्थान शब्द का प्राचीनतम उपयोग ‘राजस्थानियादित्य’ वि संवत 682 में उत्कीर्ण वसंतगढ़ (सिरोही ) के शिलालेख में मिलता है ।उसके बाद मुहणोत नैणसी की ख्यात व राजरूपक में राजस्थान शब्द का प्रयोग हुआ है सन् 1800 ई.में "जार्ज थामस" ने राजस्थान के इस भाग के लिए ‘राजपुताना’ की संज्ञा दी। इस बात का उल्लेख विलियम फ्रेंकलिन की पुस्तक "मिलिट्री मेमोरी" में आता है। कर्नल जेम्स टॉड ने इस राज्य को “रायथान” कहा क्योंकि स्थानीय साहित्य एवं बोलचाल में राजाओं के निवास के प्रान्त को ‘रायथान’ कहते थे। 19 वी. सदी में कर्नल जम्स टाॅड ने अपनी पुस्तक “एनाॅल्स एंड एटीक्विटिज आॅफ राजस्थान” मेे राजस्थान शब्द का प्रयोग किया। इस पुस्तक का दूसरा नाम “सैण्ट्रल एंड वेस्टर्न स्टेट्...